अनंत ब्रामंड का होना, ग्रह आकाशगंगा, तारे, क्लस्टर से बढ़े सुपरक्लस्टर अनंत आकार का ब्रह्मांड में एक नीले ग्रह पेल व्लू डॉट’ अर्थात हमारी पृथ्वी पर जीवन का होना एक हादसे से कम न हैं। जीवन अर्थात् कोशिकीय गति प्रजनन और वृद्धि ठीक उसी तरह है जिस तरह हमारी पृथ्वी और आकाशगंगा का चक्र। भारत एक कहानी’: की शुरूआत में भारत भूमि पर जीवन की शुरूआत और धर्म की अनोखी, अनसुलझी कहानी के साथ करना चाहता हूँ, जो आज के समय में वृद्ध स्तर पर गलत परिपेक्ष्य में समझी जाती है।
हिंदूइज्म अर्थात हिन्दू धर्म को सनातन धर्म कहना अधिक उचित होगा क्योंकि यह एक विचार है, जिसे आप मार नहीं सकते यह उस सूर्य की किरण की तरह है, जो उजाले बिखेरती है, सदियों से।
पहली बार अंग्रेज भारत की पवित्र भूमि की यात्रा पर आए थे, यहां पर उन्होंने जो देखा उन्हें यह बड़ा विचित्र लगा। उन्होंने यह जरूर सोचा होगा आखिर यह कैसे भगवान हो सकते है— सूंठ वाले भगवान (गणेश) नाग पर बैठा आदमी (विष्णु) छाल का वस्त्र धारण किया व्यक्ति (शिव) फिर उसकी मुलाकात एक सच्चे हिंदू से हुई जिसने उसे समझाया, इसका रहस्य क्या है उसने चित्र के पीछे छिपे रहस्यवाद प्रतीक चिन्हता उजागर किया और समझाया ध्यान से सुनो, जो मैं कहता हूँ।
हाँ! यह तस्वीर जिसमें गणेश, शिव, विष्णु आदि है इनकी कहानी सुनो आखिर कब, कैसे ये बने और ये किस बात का प्रतीक हैं
विष्णु प्रतिमा की कहानी, विशाल शेषनाग पर बैठा, सुंदर व्यक्ति जो अनंत सागर (शीर सागर) पर हैं जिसकी चरणों के पास माता लक्ष्मी बैठी हुई उनकी सेवा कर रही है, यह तस्वीर की प्रतीका चिन्हता बतलाता हूँ, ध्यान से सुनो शायद यह अत्यंत गूढ रहस्य जानने का मौका दोबारा न मिलेगाः
''हिन्दू धर्म पूर्ण रूप से प्रतिीकाचिन्हता पर आधारित है, जो जीवन की वास्तविकता को प्रतिबिंबित करता हैः यह विष्णु चित्र बतलाता है: तुम स्वयं विष्णु हो और यह झीर सागर तुम्हारे अनंत कोशिका में बने मस्तिष्क में चलने वाले विचार जो माया से आकर्षित हैं, लक्ष्मी प्रतीक है— माया (धन) भौतिकतावाद का अर्थात सुख की सभी वस्तुएं तथा आदि — अनंत शेषनाग बतलाता है समय जिसका न आदि है अर्थात् प्रारंभ ना अंत अर्थात शुन्य इसी कारण आज तक किसी भी धर्म और वैज्ञानिक ने इसकी सही परिभाषा नहीं दे पाई है।
अब सुनो इस चित्र (विष्णु चित्र) का वर्तमान में अर्थ, जब तक मनुष्य सांसारिक मोह माया के पीछे भागता है अपने मन पर नियंत्रण नहीं कर पाता तो वह भागता ही रह जाता है संपूर्ण जीवन उसे प्राप्त नहीं कर पाता अतः जिस दिन वह अपना कर्म पूर्ण कर्मठता से करेगा उस दिन उसे सारी माया की प्राप्ति होगी इसीलिए उस विष्णु चित्र में माता लक्ष्मी उनके चरणों के समीप बैठकर उनकी सेवा करती हैं।
इस तरह उस ऋषि ने विदेशी यात्रा के हिंदू धर्म की अनकही, अनसुलझी गुत्थी की मोटी परत को खोलने का काम किया।
हिंदू धर्म हर एक हिंदू के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है यही इसकी खास बात है, आप मंदिर जाए या न जाए, व्रत, धर्म—अनुष्ठान करे या न करे हर चीज की पूरी स्वतंत्रता है और इसे हर हिंदू व्यक्ति अपने हिसाब से पूरी करता है।
इस तरह भारत एक कहानी की शुरूआत इस अनंत ब्रह्माड में नीले ग्रह पर जीवन का होना एक हादसा होने से शुरूआत कर पावन भूमि— भात पर धर्म के रहस्यवाद और ईश्वरचित्र में छिपे जीवन के गूढ रहस्य को उजागर किया गया है। पर अभी इस कहानी में एक विचित्र मोड और बड़ी अवधारणा के साथ समाप्त होगा जो है— मानो तो सब कुछ है, न मानो तो कुछ भी नहीं''
अर्थातः हिन्दू धर्म की मूल 12 बारह अवधारणा मानी गई है % जो जन्म पुर्नः जन्म, काल, कर्म का फल, आदि&आदि है इनमें से एक अति महत्वपूर्ण कहानी मैं रखना चाहता हूँ।
अल्बर्ट आईन्स्टाइन ने 20वीं शताब्दी में कहा: म त्र उब2 ऊर्जा कभी नष्ट नहीं होती और समय रिलेटिव होता है आप प्रकाश की गति से भी अधिक गति से पृथ्वी से बाहर आकाशगंगा पर जाऐंगे तो समय पृथ्वी की तुलना पर कम होगा यही बात 2000 वर्ष पहले हिन्दू धर्म में कही गई थी। समय रिलेटिव होता है, इसीलिए चार काल% 4:3:2:1
सत्युग (34,56,000) वर्ष
त्रेतायुग (17,28,000) वर्ष
द्वापरयुग (8,64,000) वर्ष
कलियुग (4,32,000) वर्ष
बतलाया गया है हम भारतीयों की औपनिवेशिका शासन के कारण एक बड़ी बुरी आदत हो गई है, कि कोई विदेशी हमें कोई बात बोले तो हम बढ़ी जल्दी उसे मान लेते है क्या करें हम भारतीय इतने भोले जो हैं।
अतः हमारा भोलापन और सहिष्णुता हमारी पूंजी है ओर हमारी मजबूती भी ।
अतः भारत की अनोखी कहानी को चार पद्य में समेटते हुए मैं इस कथा का समापन करता हूँ
भारत की कहानी,
है सदियों पुरानी,
गंगा से गीता तक
हिमालय से विंध्या तक
अबिरल धरा सी
ज्ञान के धरा सी
कही अनकही अनसुनी
है ये ‘‘भारत की कहानी''।।
अंतिम में ‘‘मानो तो सब कुछ है, न मानो तो कुछ भी नहीं'' ।
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