जहाँ खुलते है स्वर्ग के दरवाजे,
जहाँ रहती है वसुंधरा मनुष्य का बोझ साजे़
जहाँ बहती है पावन गंगा की धरा,
वही है भारत देश हमारा।
जहाँ खड़ा है पर्वतों का सम्राट होकर अचल
जहाँ बहती है नदियाँ करके स्वर चल—चल
जिसका सर्मपण और सम्मान हमें है प्यारा,
वही है भारत देश हमारा।
गाँव की मिट्टी में लहराते गेहूँ के सुनहरे दाने,
इस दृष्य को देखे बिना हमारा मन ना माने,
जहाँ बच्चे बनते है अपने बूढ़े माँ—बाप का सहारा,
वही है भारत देश हमारा।
गाँव की मिट्टी में लहराते गेहूँ के सुनहरे दाने,
इस दृश्य को देखे बिना हमारा मन ना माने,
जहाँ बच्चे बनते है अपने बूढ़े माँ—बाप का सहारा,
वही है भारत देश हमारा।
जहाँ बोली जाती है विभिन्न प्रकार की बोलियाँ,
जहाँ हिन्दू—मुस्लिम मनाते है मिलकर रंगोलियाँ,
जहाँ देखने को मिलता है इन्सानियत का नजारा,
वही है भारत देश हमारा।
जहाँ सभी मज़हब के लोगों का धर्म है,
जहाँ अपनेपन की भावना ही लोगों का कर्म है,
जहाँ दूर हो जाता है सारा अधियारा,
वही है भारत देश हमारा।
जहाँ दूर हो जाता है लोगों का अन्ध—विश्वास,
जहाँ होता है अपनेपन का एहसास,
जहाँ दूर हो जाता है सारा अधियारा,
वही है भारत देश हमारा।
जहाँ दूर हो जाता है लोगों का अन्ध—विश्वास,
जहाँ होता है अपनेपन का एहसास,
जहाँ टूटता है आकाश में चमकता तारा,
वही है भारत देश हमारा।
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