Batch No. 213 भारत एक कहानी


प्राचीन भारत की आबोहवा ही कुछ ओर थी। भारत एक विभिन्न राज्यों वाला विशाल देश है। जहाँ सभ्यता और परंपराओं का अपना ही महत्व है। जहाँ हर धर्म के लोग निवास करते है। आज के भारत और प्राचीन भारत की बात अलग थी। प्राचीन भारत में अनेक राजाओं ने राज्य किया। अपनी शासन के अंदाज से किसी ने अपना नाम अमर कर लिया और कईयों कानाम सिर्फ नाम रह गया।
प्राचीन भारत की शिक्षा प्रणाली का जवाब नहीं। जहाँ तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्व प्रसिद्ध संस्थाएँ थी वह आज भी है, परन्तु उनकी चमक थोडी फीकी पड़ गयी है। भारत एक ऐसा देश है, जहाँ आचार्य चाणक्य जैसे महान गुरू ने जन्म लिया। अपनी अर्थशास्त्र के विस्तार ज्ञान के कारण वह विश्व प्रसिद्ध हो गए। उनकी ख्याति तब और बढ़ी जब उन्होंने एक सामान्य बालक को मगघ का राजा बना दिया। तक्षशिला में उस समय सामान्य बालक को दाखिले की अनुमति नहीं थी। अपने पराक्रम और बुद्धिमता से चन्द्रगुप्त मौर्य ने दाखिला पाया। आचार्य चाणक्य के कारण ही उस बालक का नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। ऐसी बहुत सी कहानियाँ हैं।
भारत में अनेक वीर पुत्रों का जन्म दिया। कई वैज्ञानिकों और गणितज्ञओं को जन्म दिया। रामानुजन जिन्होंने अनंत की खोज की। .पी.जे. अब्दुल कलाम अपने जीवन में बहुत कठिनाइयों का सामना करके इतने ऊँचे मुकाम तक पहुंचे थे। आज वह मिसाइल मेन आॅफ इंडिया के नाम से मशहूर है। एक बार जब मिसाइल लाॅच असफल रह गया। तब कलाम जी हताश हो गए। वह प्रेस कांफ्रेस में क्या कहते वह सोच नहीं पा रहे थे। प्रेस कांफ्रेंस के वक्त उनके मुंह से आवाज नहीं निकल रही थी। तब उनके सिनियर ने उनसे माईक लेकर प्रेस काफ्रेंस को आगे बढ़ाया। कलाम जी बहुत प्रसन्न हुए। अगली बार जब प्रेस कांफ्रेंस हुई तब उनके सिनियर ने माईक उनके सामने रख दी क्योंकि मिसाइल लांच सफल हो गया था। परिस्थितियों का एक ऐसा संयोजन भारत के अलावा और कहा मिलेगा।
भारत में अनेक प्रातों  के लोग एक साथ खुशी-खुशी रहते हैं।  एक राज्य से दूसरे राज्य तक जाने में कोई पूछताछ नहीं होती। प्राचीन भारत की कला, सभ्यता,संस्कृति आज भी हमारे मन को मोहित कर जाती है। उस समय के लोग बहुत कठिनाइयों से अपना जीवन व्यतीत करते थे। उस वक्त के लोग परिश्रमी और शूरवीर हुआ करते थे। हम आज के भारत में उन्हीं संस्कृतियों परंपराओं और सभ्यताओं को विलुप्त कर रहे है। हम गर्व से कहते है। हम आधुनिक तकनीकों से लैस है। परंतु इस चकाचैंध वाली दुनिया में हम अपनी पंरपराओं और संस्कृतियों को विलुप्त कर रहे है।
भारत का भू-भाग बड़ा विशाल है। उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक बड़ा ही सुंदर दृश्य है। यहाँ अनेक नदियाँ, बहती है। यहाँ हम नदियों के पानी की पूजा करते हैं। यहा का जन जीवन बाकी के देशों से अलग है।
पर हमारे इस भारत को जो पहलेसोने की चिड़ियाहुआ करता था, बहुते से देशों ने हमारे इससोने की चिड़िया को लूट कर खोखला कर दिया। अंग्रेजों से युद्ध के समय जो भारत के लोगों ने एकता दिखाई थी वह अद्वितीय थी। देशभक्ति ने पूरे देश को जगा दिया था।
भारतवासियों में जो देश प्रेम है, वह और किसी देश में देखने को नहीं मिलता। कितने ही जवाने ने देश को आजाद कराने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। कितनी माताओं ने अपने पूत्रों को खो दिया।
देशभक्ति पर एक छोटा-सा अंश - एक बार 1936 में बर्लिन में ओलंपिक खेल चल रहे थे। उस समय भारत और जर्मनी के बीच हॉकी का निर्णायक मुकाबला चल रहा था। खेल का मैदान भारतीयों के अनुकूल नहीं था। उनके पास आधुनिक जूते भी नहीं थे। तब मेजर ध्यानंचद ने नंगे पाँव हाकी खेली। यह देख सभी साथियों ने भी ऐसा ही किया। भारत वह मैच 8-1 से जीत गया। वह मैच वहा का तानाशाह भी हिटलर भी देख रहा था। वह भारत के प्रदर्शन से अचंभित हो गया। उसने मेजर से पूछा की आज क्या करते हो, वह बोले- ‘मैं आर्मी में हूँ।उसने कहाँ हमारे देश में जाओं मैं तूम्हें में फिल्ड मांर्शल बना दूँगा। उन्होंने मना करते हुए देशभक्ति का परिचिय दिया।
यह मत सोचो की देश ने तुम्हारे लिए क्या किया, बल्कि यह सोचो की तुमने देश के लिए क्या किया।

भारत माता की जय

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