MASOOM (JNU) नायक और नायिका


प्यार भी भरपूर गया
माँ का सिंदूर गया
नन्हें ननिहालों की लंगोटियाँ गई

बाप की दवाई गई
भाई की पढ़ाई गई
दोटी बेटियों की ख्वाहिशें दुआएं गई
बहन की राखी की कलाई गई 
अचानक ऐसा हुआ एक विस्फोट,
कि जिस्म की सारी बोटियां ही गई

जाने पर्वतों पर कितने सिंदूरी सपने मरे  होंगे
बीस बसंती मगमासी में प्राण हरण हुए होंगे
टूटी चूड़ी, मिटा सिंदूर, रूठा कंगन हाथों का
कोई मोल नहीं दे सकता, इन बासंती जज़बातों का। 

उन दो आँखों के आँसू के आगे सातों समंदर हारे हैं
जब उन मेहंदी वाले हाथों ने अपने मंगलसूत्र उतारे हैं। 

माँ ने अपने पुत्र को सिखारया था कि
एक इंच पीछे मत हटना,
चाहे इंच-इंच कट जाना।

उसके घर का चिराग गया
इस वतन का सच्चा नायक गया
बदले मं छोड़ एक तिरंगा
ये कैसा हुआ एक सौदा

बिलखती नायिका बचा ना पाई अपना एक घरौंदा

Comments