PRAGYA SHIVA (JNU) भारत एक कहानी


भारत एक कहानी, मेरा भारत एक कहानी,
जहाँ प्रेम की बहती धारा, झरती जहां खानी,
भारत एक कहानी, मेरा भारत एक कहानी।

मंद-मंद बहती सरिता, प्रत्यक्ष निवेदन करती,
युग-युग की कहर नयी-पुरानी, गाथा का सच कहती,
जहाँ कई भवान खड़े हैं, ब्रह्मा, विष्णु, महेश,
देवी का अवतार लिए आती, गौरा, श्री, वरदा।

किस-किस की मैं कहूँ कहानी, सजती यहां जुबानी
भारत एक कहानी, मेरा भारत एक कहानी।

ऋषि मुनियों की भूमि यही, गौरव मानव संसृति की,
यहीं कहीं तो कृष्ण जन्मे, राम की यहीं सदी थीं।
मैं क्यों भूलुँ उसी धरा पर बुद्धा की महिमा थी,
महावीर का गौरव था यह, ऐसी यह भूमि थी।

हर युग में इसकी महानता, की थी रीत पुरानी,
भारत एक कहानी, मेरा भारत एक कहानी।

वीर पुरातन हों या नूतन, धरती उनसे भरी थी,
राणा हों या वीर शिवाजी, लक्ष्मी यहीं लड़ी थी।
गांधी का माहात्मय यहां था, यहीं थे लाल-जवाहर,
किसके -किसके गुण गाऊँ, हैं कोटि-काटि को वंदन।

दुनिया का हर देश यहाँ की गाता अमृत वाणी,
भारत एक कहानी, मेरा भारत एक कहानी।

इसी धरा पर लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा है,
संस्कारों से पटी पड़ी यह भारत माँ सरला है। 
नहीं बँटे यहाँ भाई-भाई, हृदयों का पहरा है,
जाति-धर्म की विविध मीत पर, प्रेम का महल बड़ा है।

यहाँ घरों में दादी-नानी गढ़ती रोज भवानी,
भारत एक कहानी, मेरा भारत एक कहानी।

वेद-ऋषियों से पूरित है अपनी माँ की भूमि,
प्रथम सभ्यता का वंदन हुआ यहीं, हाँ यहीं।
करो इसका उपकार अरे विश्व जगत के वासी,
गीता, पुराण का देश यही, फिर किसके हो अभिलाषी।

आज यहाँ विज्ञान जगत में इसने धूम मचा दी
भारत एक कहानी, मेरा भारत एक कहानी।

लौटेंगे फिर इसी देश में कहां छोड़ जाओगे,
अपना भारत पावन भारत किसको अपनाओगे,
जो भारत के नए भविष्य फिर तुम पछताओगे,
हो अमेरिका या जापान, यह त्याग कहां पाओगे।

अपनी संतानों को यह रौ कर कहती माँ का वाणी,

भारत एक कहानी, मेरा भारत एक कहानी।

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