Batch No. 034 भारत एक कहानी: एक कहानी

भारत यह एक ऐसा देश हैजहाँ हमें प्राचीन काल से लेकर आज तक अनेक प्रकार की विविधताएं देखने में मिलती है, इन विविधताओं में सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, भैगोलिक एवं वैचारिक अनेक प्रकार की विविधतायें हैजिसमें हमारी महानता झलकती है, हम उसी विविधता में एकता का निर्माण किये हुए हैं।
भारतकी इन्हीं विशेषताओं का वर्णन हम अपने विचारों द्वारा करेंगे परन्तु इससे पहले भारत देशभारतक्यों कहा जाता है? इस पर कुछ लोगों के साथ मेरा भी मानना है कि राजा दुष्यन्त एवम् शकुन्तला के पु़त्र के नाम पर इस देश कोभारतनाम से जाना जाता है। अब भारत की विशेषताओं पर हम विचार करेंगे-
भारत प्राचीनकाल में एक आदर्शवादी राष्ट्र था, जहां राष्ट्र के विकास में हर व्यक्ति का योगदान था, जहाँ वह किसी वर्ण या जाति में उत्पन्न हुआ हो। सभी अपने कर्मों से भारत को एक राष्ट्र बनाये रखने में पूरी तन्मयता से साथ देते थे। हमारे भारत देश के प्राचीनकाल में कई धर्मिक आन्दोलन हुए, परन्तु उसमें भारत की कुछ ऐसी अपनी धरोहर सुरक्षित है, जिसे ये धार्मिक हवा के झोंकों भी नहीं हिला सके बल्कि इसी भारत में समाहित हो गये। सामाजिक दृष्टि से भारत के यहाँ जो वर्ण-व्यवस्था थी, जिसका वर्णनऋग्वेदकेपुरुष सूक्तमें भी प्राप्त होता है, वह वर्ण-व्यवस्था कर्मों के अनुसार थी। यही राजनीतिक दृष्टि से भी थे। वेदाध्ययन आदि शैक्षिक कार्यों में लगा व्यक्ति ब्राह्मण था, जो देश को आदर्श नवयुवक प्रदान करने में भारी सहयोग देते थे, क्षत्रिय रक्षा करता है, यह आज हमारी भारतीय सेना की तरह थे, जो हमारे देश की रक्षा अपने प्राणों का बलिदान कर, करते थे। वैश्यों का कार्य व्यापार था।
भारत में प्राचीनकाल में शिक्षा का स्तर बहुत ऊँचा था परन्तु भारत के मध्यकाल में कुछ सामाजिक कुरीतियां गयी, जैसे सती प्रथ, बालविवाह इत्यादि, जिससे समाज की स्थिति दयनीय होती गयी। यहीं से भेदभाव भी अधिक उत्पन्न होने लगे और भारत आधुनिक काल में अंग्रेजों के चंगुल में फँसकर गुंलाम हो गया। यह कहना अतिशयोेक्ति नहीं होगी कि इस भारत देश के कुछ राजागण या शासकों ने बाह्य आक्रमणकारियों का साथ दिया।
और आज आधुनिक समय में भारत भले ही आजाद हो गया है लेकिन मेरा मानना है कि पहले की अपेक्षा भरत आज और अधिक गुलामी की जंजीरों में बंधा चला जा रहा है, यह गुलामी वैचारिक स्तर, सांस्कृतिक स्तर पर, वेश-भूष एवं भाषा के स्तर पर इत्यादि स्थलों में भँली-भाति दिखायी दे रहे हैं, जिससे भारत भारत भले ही आज चन्द्रमा पर पहुँच चुका हो, मंगलग्रह का अभियान उसने सफलतापूर्वक किया हो लेकिन हमें अपनी आधारभूत या यों कहें अपनी प्राचीन राष्ट्रवादी स्थिति को बनाये रखना जरूरी है।
अब हम कुछ व्यक्तित्त्वों के नाम ले रहे जो  भारत का नाम सार्थक करते हैं- राजा हरिश्चन्द्र, श्रीराम, श्रीकृष्ण, स्वामी विवेकानन्द, जगदीशचन्द्र बसु, महात्मा गाँधी, डॉ० राजेन्द्र प्रसाद, भगत सिंह, खुदीराम बोस इत्यादि। ये भारत की वे विभूतियाँ हैं, जिन्होंने भारत को पूरे विश्व में महान बनाया। यहाँ की सांस्कृतिक एकता, भौगोलिक एकता आदि भारत राष्ट्र का निर्माण करती हैं। 
कुछ लोगों का आश्चर्य होता है कि भारत जहाँ इतनी विविधतायें है, वह देश कैसे इतने सालों से टिका हुआ है, भारत देश पर इतने आक्रमण हुए, इतनी धार्मिक आंधियाँ आयीं, कितने वादों (विचार) का प्रसार हुआ, कितने बोल या भाषायें यहाँ है, भोजनों में अनेक प्रकार के भोजन, जहाँ ऋतुएं, नदी, पहाड़, पर्वत सभी होते हुए भी भारत की शक्ति एकता है, जो सालों से भारत की विशेषता है, रही है और रहेगी।
भारत की कुछ वैज्ञानिकता पर भी चर्चा कर लेना आवश्यक है। मेरे विचारों में भारत का पूरे विश्व के प्रति, एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण रहा है, भारत में प्राचीनकाल से ही वैज्ञानिक पक्ष मजबूत रहा है। ऋग्वेद के सूक्तों में जो संसार के प्रति भारतीय दर्शन रहा है वहीं आगे चलकर कई वैज्ञानिक दृष्टिकोण बने। भारत पूरे विश्व की उत्पत्ति में वैज्ञानिक तर्क एवं अनुभव दोनों को साथ लेकर चलता है। आज कितने प्रकार के वैज्ञानिक सिद्धान्त रहे हैं, जिसका अगर स्रोत खोजा जाये, तो हमारे ग्रन्थों, शास्त्रों में मिल जायेगें।
भारत अपने आध्यात्म के कारण पूरे विश्व में जाना जाता है, आज इतनी बीमारियाँ समाज में हैं, जिसे डॉक्टर सही उपचार नहीं कर सकता है, पर हमारे यहाँ योग एवं आयुर्वेद आदि कुछ ऐसे शास्त्र है, जो आध्यात्म के क्षेत्र में आते है, और इन दोनों से मनुष्य के शारीरिक एवं मानसिक सन्तुलन बने रहते हैं वह हमेशा स्वस्थ रहता है। यह भारत की विश्व को महत्त्वपूर्ण देन है।
भारत एक शान्तिप्रिय देश रहा है, अतः वह हमेशा पूरे विश्व में शांति का संदेश देता चला रहा है लेकिन इसका यह आशय नहीं भारत युद्धों में फिसड्डी साबित होता है। भरत को आवश्यकता पेड़े तो पूरी दूनिया से भी लोहा ले सकता है। लेकिन इन सब के बावजूद भारत भारत शब्द है, जहाँ हमेशा शान्तप्रिय लोग रहे हैं।
निष्कर्षतः मैं यही कहूँगा कि मेरे भारत राष्ट्र के समान अन्यकोई राष्ट्र नहीं, जो हमारी इतनी विविधताओं में भी हम सूख पूर्वक जीना सीखता है। हमारे कत्र्तव्य एवं अधिकार बताता है। यहाँ के बच्चे-बच्चे-2 में देशभक्ति है। और अपनी मातृभूमि का बालक होने से वह अपनी भातर माता के लिए प्राण न्यौछावर कर सकता है।
माता भूमि पुत्रों अहें  पृथिव्याः।

-अथर्ववेद

Comments